राम राज्य की अवधारणा विषय पर कमला कॉलेज में प्रतियोगिता आयोजित की गई

By अजय एहसास

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Shri ram

श्री राम प्राण प्रतिष्ठा आनंदोत्सव पांच दिवसीय

सीधी। मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार श्री राम प्राण प्रतिष्ठा आनंदोत्सव पर पांच दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत 19 व 20 जनवरी को कमला स्मृति महाविद्यालय सीधी में भाषण एवं निबन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उक्त प्रतियोगिता का विषय “राम राज्य की अवधारणा” रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृति, सनातन और भारत की प्राचीन परंपरा से जोड़ना रहा। आयोजित प्रतियोगिता में छात्र–छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।

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concept of ram rajya

कॉलेज प्रवक्ता राजकपूर चितेरा ने बताया कि भाषण प्रतियोगिता में छात्रा रेखा वैश्य प्रथम स्थान, सरस्वती बैगा द्वितीय और तृतीय स्थान संयुक्त रूप से उपेन्द्र कुमार जायसवाल, रागिनी सिंह चौहान रही। निबन्ध प्रतियोगिता में रागिनी सिंह चौहान प्रथम, सरस्वती बैगा द्वितीय और रेखा बैस तृतीय स्थान पर रही।

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छात्रा रेखा वैश्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि रामराज्य में न तो कोई दरिद्र था न कोई दुखी था और न ही कोई दीनता से ग्रस्त था। यही है रामराज्य जब बड़ा छोटा न कहलाए और छोटा छोटा न कहलाए। यही राम राज्य की अवधारणा है।

प्राचार्य डॉ. के.के. तिवारी ने कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं, इसकी बौद्धिक क्षमता एवं प्रतिभा को निखारना एवं अभीष्ट लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित करना हमारा उद्देश्य है। निर्णायक की भूमिका में डाॅ. रोहित सिंह चौहान, डॉ . मनीष गिरि, धीरेंद्र कुमार शुक्ल, अनिल कुमार नायर ,रावेन्द्र कुमार यादव और पी. एन. सिंह चौहान रहे।

प्रतियोगिता का संयोजन सहायक प्राध्यापक मनोज कुमार द्विवेदी ने किया। इस मौके पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक और छात्र–छात्राएंँ उपस्थित रही।

अजय एहसास

युवा कवि और लेखक, अजय एहसास उत्तर प्रदेश राज्य के अम्बेडकर नगर जिले के ग्रामीण क्षेत्र सलेमपुर से संबंधित हैं। यहाँ एक छोटे से गांव में इनका जन्म हुआ, इनकी इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा इनके गृह जनपद के विद्यालयों में हुई तत्पश्चात् साकेत महाविद्यालय अयोध्या फैजाबाद से इन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से साहित्य में रुचि रखने के कारण स्नातक की पढ़ाई के बाद इन्होंने ढेर सारी साहित्यिक रचनाएँ की जो तमाम पत्र पत्रिकाओं और बेब पोर्टलो पर प्रकाशित हुई। इनकी रचनाएँ बहुत ही सरल और साहित्यिक होती है। इनकी रचनाएँ श्रृंगार, करुण, वीर रस से ओतप्रोत होने के साथ ही प्रेरणादायी एवं सामाजिक सरोकार रखने वाली भी होती है। रचनाओं में हिन्दी और उर्दू भाषा के मिले जुले शब्दों का प्रयोग करते हैं।‘एहसास’ उपनाम से रचना करते है।

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