कविता – अबकी गोहूं मा रोइ दिहिन ।।

By अजय एहसास

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Farmer's plight due to failure of wheat crop

युवा कवि अजय एहसास द्वारा अवधी में लिखी समसामयिक कविता

कुलि हमसे विधाता छीन लिहिन,
अबकी गोहूं मा रोइ दिहिन
ई जाने कवन बयार चली,
एकै झोंका मां खतम कीन
अबकी गोहूं मा रोइ दिहिन ।

गेहूं मा फूल लगा जइसे,
जइसे वहिमा बाली आइल
करिया करिया करिया होइगै,
दुख कै बदरा जब मडराइल

अबकी गोहूं मा रोइ दिहिन

बिजुरी चमकी गरजा बदरा,
आंखी कै सब बहिगै कजरा
अंसुवन कै धार रुकै नाही,
दइवो नाही जानी मजरा

बरखा रिमझिम रिमझिम भा शुरू,
अउ हवा पुरबिया डोलि गइल
जउन फसल खड़ी रही हिम्मत से,
आंधी पानी पा लोटि गइल

ई दशा देखि सब चकरावा,
मन ही मन भा खुब पछतावा
फसल देखि अइसन लागे,
की गइल हो जइसे लतियावा

हे इन्द्र देव तनी ध्यान करी,
ई चइत महीना दिहा तरी
कइला अइसन तू हे भगवन
कि पेट पीठ दूनौ ही जरी

कुछ बचा जवन वै पानी से,
जरिगा खम्भा के आगी से
पी के अखियन के आंसू का,
हम दूर भा रोटी सागी से

भूखी से रोवैला लइका,
भाई रोटी कहिकै छोटका।
हमरौ मनवा मा कष्ट भइल,
जब फांसी पे कलुआ लटका

तावा केहू कै जरै नहीं,
देखें का रोटी मिलै नहीं
सूखल जाता सबकै शरीर,
चेहरा केहू कै खिलै नहीं

सरकारी पिट्ठू आवैले,
कागज पे कलम चलावैले
एक बिगहा सत्यानाश भइल,
सौ रुपिया कै चेक देखावैले

सरकारी नौकर कोसैले,
कुतवा अस हमका नोचैले
छः छः लइका कै बात करै,
तिरिया दिलवा मां कोचैले

हम हाय विधाता करी काव,
कुछ समझ मां नाही आवत बा
खेती ता अपने राह गइल ,
सरकारौ आंख देखावत बा

हम कइसै सम्हारी किसानी का,
अखियां से बहै वाले पानी का
‘एहसास’ करावा से भगवन!,
कुर्सी वाले अभिमानी का।।

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अजय एहसास

अजय एहसास

युवा कवि और लेखक, अजय एहसास उत्तर प्रदेश राज्य के अम्बेडकर नगर जिले के ग्रामीण क्षेत्र सलेमपुर से संबंधित हैं। यहाँ एक छोटे से गांव में इनका जन्म हुआ, इनकी इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा इनके गृह जनपद के विद्यालयों में हुई तत्पश्चात् साकेत महाविद्यालय अयोध्या फैजाबाद से इन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से साहित्य में रुचि रखने के कारण स्नातक की पढ़ाई के बाद इन्होंने ढेर सारी साहित्यिक रचनाएँ की जो तमाम पत्र पत्रिकाओं और बेब पोर्टलो पर प्रकाशित हुई। इनकी रचनाएँ बहुत ही सरल और साहित्यिक होती है। इनकी रचनाएँ श्रृंगार, करुण, वीर रस से ओतप्रोत होने के साथ ही प्रेरणादायी एवं सामाजिक सरोकार रखने वाली भी होती है। रचनाओं में हिन्दी और उर्दू भाषा के मिले जुले शब्दों का प्रयोग करते हैं।‘एहसास’ उपनाम से रचना करते है।

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