इसी गांव चला आता है..

By अजय एहसास

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Goes to this village..

लौट के फिर क्यों इसी गाँव चला आता है,
छोड़ के शहर इसी गाँव चला आता है।
अब तो इस गाँव से पतझड़ कभी नहीं जाता,
लेकर आँधी वो इसी गाँव चला आता है।
धर्म, मजहब है और जाति का फसाद यहाँ,
वक़्त बेवक्त इसी गाँव चला आता है।
कभी बुलाने पर सुनता नहीं था जो हमको,
हाथ जोड़े वो इसी गाँव चला आता है।
ठंड से भूख से थी मौत की खबर जो छपी,
जाने क्यों वो भी इसी गाँव चला आता है।
देता भाषण है सभाएं है करता रैली वो,
वादे करने वो इसी गाँव चला आता है।
जलते चिरागों को बुझाने का है हमें ‘एहसास ‘
आग लगाने वो इसी गाँव चला आता है।

अजय एहसास
ग्राम-सुलेमपुर परसावां
अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)

अजय एहसास

युवा कवि और लेखक, अजय एहसास उत्तर प्रदेश राज्य के अम्बेडकर नगर जिले के ग्रामीण क्षेत्र सलेमपुर से संबंधित हैं। यहाँ एक छोटे से गांव में इनका जन्म हुआ, इनकी इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा इनके गृह जनपद के विद्यालयों में हुई तत्पश्चात् साकेत महाविद्यालय अयोध्या फैजाबाद से इन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से साहित्य में रुचि रखने के कारण स्नातक की पढ़ाई के बाद इन्होंने ढेर सारी साहित्यिक रचनाएँ की जो तमाम पत्र पत्रिकाओं और बेब पोर्टलो पर प्रकाशित हुई। इनकी रचनाएँ बहुत ही सरल और साहित्यिक होती है। इनकी रचनाएँ श्रृंगार, करुण, वीर रस से ओतप्रोत होने के साथ ही प्रेरणादायी एवं सामाजिक सरोकार रखने वाली भी होती है। रचनाओं में हिन्दी और उर्दू भाषा के मिले जुले शब्दों का प्रयोग करते हैं।‘एहसास’ उपनाम से रचना करते है।

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