क्या जिस्म की भूख ही सच्चा प्रेम है?

By अजय एहसास

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true love

दोस्तों, प्यार, प्रेम, मोहब्बत, आदर ,इश्क, स्नेह, चाहत, प्रणय ,अनुराग, लगाव आदि शब्दों से संबोधित होने वाला भाव आखिर होता क्या है? आइए जानते हैं सच्चा प्रेम क्या है? क्या जिस्म की भूख ही सच्चा प्रेम है? सच्चा प्रेम जिस्म का भूखा नहीं होता इसमें दो आत्माओं का मिलन होता है और यह रूहानी होता है जहां पर जिस्म की भूख हो, वह कभी प्रेम हो ही नहीं सकता है।

जहां कोई भी कार्य करते हुए दोनों एक दूसरे की भावनाओं का ध्यान न रखें, एक दूसरे की परवाह न करें, वह कभी प्यार हो ही नहीं सकता है। वह तो बस एक भूख होती है, जो एकपक्षीय ना होकर दोनों तरफ से होती है। भूख खत्म तो प्यार का पता नहीं चलता कि वो कहां विलुप्त हो जाता है?

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वैसे तो दुनिया का खूबसूरत एहसास होता है प्यार, यह जब किसी से होता है तो वह शख्स ही नहीं, बल्कि पूरी कायनात ही बहुत खूबसूरत दिखने लगती है। लेकिन आप कल्पना कीजिए, अगर वह प्यार सिर्फ एक भ्रम हो तो ? जी बिल्कुल, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जिस व्यक्ति पर आप अपने मां-बाप, अपने परिवार से भी ज्यादा विश्वास करते हैं। आपका वह प्यार ही नकली होता है। लेकिन आपकी आंखें तब खुलती हैं ,जब सामने वाला आपका विश्वास तोड़ता है। तब आप गाना गाते फिरने लगते हो कि ” दिल जबसे टूट गया”। हो सकता है आप में से बहुत से लोगों के साथ ऐसा हुआ भी हो, लेकिन किसी से प्यार करने से पहले, किसी पर अपना सब कुछ समर्पित करने से पहले, आपको असली और नकली प्यार को बेहतर ढंग से समझ लेना अत्यंत आवश्यक है।

कविता – अबकी गोहूं मा रोइ दिहिन ।।

आजकल का प्यार सिर्फ अल्फाजो में बंध कर रह गया है। फिल्मों से डायलॉग सीख कर लोग बहुत ही बेहतरीन ढंग से अपने आप को प्रस्तुत करते हैं । जैसे मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं, मैं तुम्हारे लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता हूं, अगर तुमको कोई कुछ कहेगा तो मैं सामने आ जाऊंगी , आदि आदि। किसी फिल्म का एक डायलॉग है “जब प्यार किया तो डरना क्या” पर सच तो यह है, जो आपसे प्यार करें उससे आपको डरना चाहिए कि पता नहीं क्या उद्देश्य है उसका।

लोग सिर्फ चंद शब्दों से ही आपको अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। और फिर आप किसी काम के नहीं रहते हैं । ऐसा प्यार कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है । क्योंकि समय के साथ-साथ उनके कहे हुए शब्दों के अर्थ बदलने लगते हैं । और आपको लगता है कि यह मेरा सच्चा प्यार है। नहीं बिल्कुल नहीं यह बस कुछ मीठे-मीठे बोल बोल कर शब्दों द्वारा आपके जिस्म तक पहुंच बनाने का एक अच्छा तरीका होता है। इसका इस्तेमाल आजकल बहुत ही अच्छे तरीके से लड़के और लड़कियां कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो तमाम उम्र प्यार में जीते रहते हैं । और किसी को इस बात की भनक भी नहीं होती है।

सच्चा प्यार रूहानी होता है इसमें जिस्म का कोई महत्व नहीं होता है। ना ही यह जिस्म का तलबगार होता है। जब कभी आप प्रेम का अनुभव करें, तो अपने प्रेम को एक कसौटी पर जरूर कस लेना। कि क्या मिल रहा है वहां पर? किसलिए खिंचा चला जा रहा हूं? तन की तड़प की खातिर या मन की संतुष्टि के लिए? जिस्म की भूख के लिए? या वहां जाने से आपको कुछ ऐसा मिलता है जो आप अपने आप में अपूर्णता का अनुभव करते हैं उसको पूर्ण करता है। जिस प्रेम की तरफ तुम बढ़ रहे हो , यदि उससे तुम्हारा संबंध मात्र दैहिक है तो तुम स्वयं अपने जीवन में नर्क के दरवाजे खोल रहे हो। जिन रिश्तों में प्रेम से ज्यादा जिस्म की भूख होती है। वो रिश्ते ज्यादा समय तक नहीं टिकते। ऐसे इंसान जो जिस्म की भूख मिटाने के लिए मोहब्बत शब्द को बदनाम करते हैं। जो आज इसके साथ ,कल उसके साथ, परसों किसी और के साथ, मोहब्बत का ढोंग करते फिरते हैं। एक दिन उसकी ये ढोंगी मोहब्बत नफरत में बदल जाती है। और ऐसे इंसान की कोई इज्जत नहीं करता, जो बस दूसरों का इस्तेमाल करते है।

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यह गर्लफ्रेंड ,बॉयफ्रेंड और विपरीत लिंगी मित्रता शायद इसी प्रकार की मोहब्बत का पोषक होती है। जो प्रेम आकर्षण मात्र से उत्पन्न होता है, वह क्षणिक होता है क्योंकि वह आपकी अज्ञानता से उत्पन्न होता है। इसमें व्यक्ति का आकर्षण से शीघ्र ही मोह भंग हो जाता है। और वह ऊबने लगता है ,यह प्रेम धीरे-धीरे कम होने लगता है। परंतु सच्चा प्रेम वह है जिसमें कभी थकान नहीं आती, मन उत्साह से आनंदित होता रहता है , और हर समय आप उत्साहित रहते हैं।

जब तक आपके प्रेम में नादानी रहेगी, अज्ञानता रहेगी, एक दूसरे के प्रति लापरवाही रहेगी, एक दूसरे की भावनाओं की कद्र नहीं रहेगी, आपका प्रेम दूषित हो जाएगा। और एक समय ऐसा आएगा जब वह घृणा में परिवर्तित होकर समाप्त हो जाएगा। जिस्मानी भूख पूरी होते ही आपके चरित्र पर उंगलियां उठने लगेंगी। जब कोई आपके प्रेम पर संदेह करता है। और आपको अपने प्रेम को साबित करना पड़ता है। तो यह प्रेम एक बोझ बन जाता है। आप जिसके साथ बात करने, जिसके साथ रहने में स्वयं को स्वच्छंद, खुश एवं सहज महसूस करते हैं। उसके प्रति मन में कोई शंका नहीं होती। शंका होती भी है तो बस इतना ही की कहीं वह आपको खो ना दे, या आप उसको खो ना दें।

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यदि आपका प्रेम सच्चा है तो आपको कुछ भी साबित करने की आवश्यकता नहीं। क्योंकि यदि आपके जीवन में बस एक व्यक्ति है तो फिर आप कभी भी उससे दूर नहीं जा पाएंगे ना ही वह आपसे दूर होकर रह पाएगा। ना ही उससे गुस्सा होकर ज्यादा समय तक रह पाएंगे। और फिर स्वयं ही वह सुबह का भूला शाम तक वापस आ जाएगा। सच्चा प्रेम इंसान की आत्मा में पलने वाला एक पवित्र भाव है। दिल में उठने वाले भावों को तो आप शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं। परंतु हृदय में किसी के प्रति प्रेम है तो आप अभिव्यक्त कर ही नहीं सकते हैं । क्योंकि वह एक एहसास मात्र होगी और एहसास के जुबान नहीं होते हैं वह बेजुबान होता है। उसकी कोई भाषा नहीं होती उसे मात्र अनुभव किया जा सकता है। और रहीं बात सच्चे प्यार की ,तो सच्चा प्यार बस देने और देते रहने में विश्वास रखता है, पूरी तरह से एक दूसरे पर समर्पित रहता है।

सच्चा प्रेम वह होता है जिसमें अपने लिए केवल यह चाहत होती है कि हम जिससे प्रेम कर रहे हैं उसे हमेशा खुश कैसे रखें? क्योंकि तब आपको उसकी खुशी में ही अपनी खुशी नजर आती है।

– अजय एहसास
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अजय एहसास

युवा कवि और लेखक, अजय एहसास उत्तर प्रदेश राज्य के अम्बेडकर नगर जिले के ग्रामीण क्षेत्र सलेमपुर से संबंधित हैं। यहाँ एक छोटे से गांव में इनका जन्म हुआ, इनकी इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा इनके गृह जनपद के विद्यालयों में हुई तत्पश्चात् साकेत महाविद्यालय अयोध्या फैजाबाद से इन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से साहित्य में रुचि रखने के कारण स्नातक की पढ़ाई के बाद इन्होंने ढेर सारी साहित्यिक रचनाएँ की जो तमाम पत्र पत्रिकाओं और बेब पोर्टलो पर प्रकाशित हुई। इनकी रचनाएँ बहुत ही सरल और साहित्यिक होती है। इनकी रचनाएँ श्रृंगार, करुण, वीर रस से ओतप्रोत होने के साथ ही प्रेरणादायी एवं सामाजिक सरोकार रखने वाली भी होती है। रचनाओं में हिन्दी और उर्दू भाषा के मिले जुले शब्दों का प्रयोग करते हैं।‘एहसास’ उपनाम से रचना करते है।

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