नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) पर प्रातःकाल चिचड़ी से स्नान करने पर मिलेगी मुक्ति

By प्रभुनाथ शुक्ल

Published on:

शरीर पर तिल के तेल की मालिश कर सूर्योदय से पहले करें स्नान

नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली के रुप में भी जानते हैं लोग

भदोही, 02 नवम्बर । नरक चतुर्दशी दीपावली के पांच दिवसीय महोत्सव का दूसरा दिन है, जिसे हिंदू कैलेंडर अश्विन महीने की विक्रम संवत में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अर्थात चौदहवें दिन मनाई जाती है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है।

Astrologer Pandit Atul Shastri
Astrologer Pandit Atul Shastri

कैसे करें पूजन

ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री के अनुसार, इस दिन सुबह हस्त नक्षत्र होने से आनंद नाम का शुभ योग बन रहा है। इसके अलावा सर्वार्थसिद्धि नाम का एक अन्य शुभ योग भी इस दिन सुबह-सुबह रहेगा। इस दिन शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके सूर्योदय से पहले स्नान करने का विधान है। स्नान के दौरान अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) को शरीर पर स्पर्श करना चाहिए। अपामार्ग को निम्न मंत्र पढ़कर मस्तक पर घुमाना चाहिए।

सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्।हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:।।

नहाने के बाद साफ कपड़े पहनकर, तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके निम्न मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देनी चाहिए। यह यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार तर्पण कर्म सभी पुरुषों को करना चाहिए, चाहे उनके माता-पिता गुजर चुके हों या जीवित हों। फिर देवताओं का पूजन करके शाम के समय यमराज को दीपदान करने का विधान है।

नरक चतुर्दशी है छोटी दीपावली

नरक चतुर्दशी की उचित जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री ने बताया, नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले, रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात को। इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं।

क्यों जलाए जाते हैं द्वीप

शास्त्री के अनुसार एक पौराणिक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष्य में दीयों से पूरा घर सजाया जाता है।

श्रीराम दीपावली के लौटे थे

अयोध्याज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री यह भी कहते हैं इस त्योहार को मनाने का मुख्य उद्देश्य घर में उजाला और घर के हर कोने को प्रकाशित करना है। कहा जाता है कि दीपावली के दिन भगवान श्रीराम चन्द्र जी चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या आये थे तब अयोध्या वासियों ने अपनी खुशी के दिए जलाकर उत्सव मनाया व भगवान श्री रामचन्द्र माता जानकी व लक्ष्मण का स्वागत किया। कहीं कहीं पर ये भी माना जाता है की आज के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था।

प्रभुनाथ शुक्ल

लेखक वरिष्ठ पत्रकार, कवि और स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। आपके लेख देश के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित होते हैं। हिंदुस्तान, जनसंदेश टाइम्स और स्वतंत्र भारत अख़बार में बतौर ब्यूरो कार्यानुभव।

Leave a Comment