शीर्षक- गणतंत्र दिवस

By अजय एहसास

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kavita republic day 2022

हम भारत के वासी हमने कभी न मानी हार
नहीं बैठते हैं चुप होकर कोई करे प्रहार
वक्त नहीं भूलेंगे ना वो संघर्षों का जमाना
त्याग और बलिदान नहीं भूले इतिहास पुराना।

कुछ करने की ना आजादी ना थे हम आजाद
विदेशी हमलावरों ने करना चाहा था बर्बाद
साथ में कुछ अपनों ने भी भीतर से घात किया था
आजादी के परवानों ने उनको मात दिया था।

57 से 47 तक बहुतों ने जान वारी थी
आग बन गई 57 की जो छोटी चिंगारी थी
संघर्षों में वीर मौत से खौफ नहीं खाते थे
अंग्रेजों की सेना को मैदान में धूल चटाते थे।

आजादी का जज्बा सब के खून में बसा देते थे
फिरंगियों को उनके जाल में खुद ही फंसा देते थे
क्रांतिकारियों वीरों ने अपना सर्वस्व गंवाया था
खुद फांसी पर झूल गए हमको आजाद कराया था।

हिंदू मुस्लिम नहीं सिर्फ भारतवासी कहलाये थे
देश प्रेम में डूब देश की खातिर जान गवाये थे
फर्ज वो अपना निभा गए दे करके जो अपनी जाने
कर्ज में डूबे सदा रहे हम आजादी को पहचाने।

बलिदानी वीरों जैसा हर सैनिक फर्ज निभाता है
देश बचाने को सीमा पर खुद शहीद हो जाता है
जाति धर्म और क्षेत्रवाद कुछ लोगों ने फैलाई है
आज देश के लिए ये घातक सबसे बड़ी बुराई है।

इन वादों में पड़ विवाद में खुद को हम उलझाये हैं
कमी छुपाने को अपनी सब जनता को भरमाये हैं
ऊंच-नीच का भेद छोड़ दो बड़ा नहीं छोटा समझो
छोटी बातें बड़ी बनाकर आपस में ही ना उलझो
संविधान की समानता के पथ का धर्म निभाएंगे
इस गणतंत्र दिवस हम मिलकर राष्ट्रध्वजा फहराएंगे।

-अजय एहसास
अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)

अजय एहसास

युवा कवि और लेखक, अजय एहसास उत्तर प्रदेश राज्य के अम्बेडकर नगर जिले के ग्रामीण क्षेत्र सलेमपुर से संबंधित हैं। यहाँ एक छोटे से गांव में इनका जन्म हुआ, इनकी इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा इनके गृह जनपद के विद्यालयों में हुई तत्पश्चात् साकेत महाविद्यालय अयोध्या फैजाबाद से इन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से साहित्य में रुचि रखने के कारण स्नातक की पढ़ाई के बाद इन्होंने ढेर सारी साहित्यिक रचनाएँ की जो तमाम पत्र पत्रिकाओं और बेब पोर्टलो पर प्रकाशित हुई। इनकी रचनाएँ बहुत ही सरल और साहित्यिक होती है। इनकी रचनाएँ श्रृंगार, करुण, वीर रस से ओतप्रोत होने के साथ ही प्रेरणादायी एवं सामाजिक सरोकार रखने वाली भी होती है। रचनाओं में हिन्दी और उर्दू भाषा के मिले जुले शब्दों का प्रयोग करते हैं।‘एहसास’ उपनाम से रचना करते है।

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