जाड़े के मौसम आवते ही ठंड महारानी पूरा हुकूमत संभाल लेली। जइसे कवनो नया कलेक्टर जिला में आ गइल होखस। गाँव-शहर सब जगह एक्के कानून लागू रजाई में रहब या फिर पछतइब! सुबह के अलार्म बाजेला त लोगन के लागत बा कि ई अलार्म ना, दुश्मन के बिगुल ह। आँख खुलते ही आदमी पहिला दर्शन करेला। धुआँ छोड़त आपन साँस ऊ सोचेला हे भगवान, हम जिंदा बानी कि प्रिâज में रखाइल कवनो मुर्गा।
ठंड में सबसे जादा प्रेम रजाई से हो जाला। आदमी आपन मेहरारू के भुला सकेला, बाकि रजाई के ना। जे रजाई छोड़ के बाहर निकल जाला, ओकरा के समाज वीर पुरुष घोषित कर देला। बाकि सच पूछीं त ऊ वीर ना, मजबूर होला, काहे कि ऑफिस जाए के डर रजाई से बड़हन होला।
एही मौसम में पकौड़ी, बड़ा अउरी चाय के डिमांड अचानक बढ़ जाली, घर में जइसे ही कवनो कह देला गरमा-गरम कुछ बनाइए, पूरा परिवार एक्टिव मोड में आ जाला। ठंड में भूख कम अउरी फरमाइश जादा हो जाली। लोग हीटर चलाके ओहू के सामने हाथ सेंकेला अउरी बिजली बिल देख के फेर काँपे लागेला ठंड दु तरफा हमला करेली, शरीर पर भी अउर जेब पर भी।
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बच्चन के स्कूल जाए के समय आवेला त असली महाभारत शुरू होला। माई कहेली उठऽ, देर हो रहल बा। लइका रजाई में घुस के जवाब देला, आज हमार तबीयत खराब बा। ऊ तबीयत खराब ना, मौसम के प्रभाव होला। स्कूल बस आवे त बच्चा एही तरह मुंह बनावेला जइसे ओकरा के सियाचिन भेजल जात होखे।
बाजार में स्वेटर-मफलर वाला दुकानन पर भीड़ लाग जाली। लोग तीन-तीन कपड़ा पहिन के घूमेला अउरी तबो कहेला, आज त बहुते ठंड बा भाई। रेलवे स्टेशन, बस अड्डा पर अलाव जरेला अउरी चार आदमी ओकरा चारो ओर खड़ा होके राष्ट्रीय समस्या पर चर्चा करेला कि ठंड बढ़ गइल बा, सरकार कुछ करत नइखे।
असल में ठंड कवनो साधारण मौसम ना, ई एगो मानसिक अवस्था ह। ई आदमी के आलसी बना देली, देर से उठावे सिखा देली अउरी गरम चीज के महत्व समझा देली। जाड़ा जब करेर होला त हमरा गाँव-देश के लोग मायानगरी यानी मुंबई भागेला, उहाँ ठंड के कवनऊ असर नइखे दिखेला। अपन के गाँव में त हरजाई ठंड रजाई से भी नइखे मानेला।


