रंगों की फुहार लिए आई है होली,
खुशियों की बहार लिए आई है होली।
मिट जाए मन के सब बैर-विरोध,
प्रेम का उपहार लिए आई है होली।
गुलाल की खुशबू से महके आंगन,
हँसी की गूंज से जगमग हो जीवन।
ढोल की थाप पर थिरके हर दिल,
रंग दे सबको उमंगों का सावन।
ना कोई छोटा, ना कोई बड़ा,
आज सबके मन का एक ही धरा।
मिल-जुलकर गले लगें हम ऐसे,
जैसे रंगों में घुला हो सवेरा।
प्रेम, करुणा और एकता का संदेश लिए,
हर द्वार पर खुशियों का डेरा।
शब्दों से रंग भरता मन की तस्वीर में,
होली पर मुस्कुराए हर चेहरा —
यही कामना करता है आपका अपना
रंगों का कवि, ‘चितेरा’।
