सीधी। स्थानीय कमला स्मृति महाविद्यालय में बुधवार को औद्योगिक वानस्पतिक विज्ञान विषय पर एक भव्य शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने ज्ञानार्जन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इस संगोष्ठी का शुभारंभ माँ वीणापाणि के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें प्राचार्य डॉ. रोहित सिंह चौहान, विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र कुमार शुक्ला, वरिष्ठ प्राध्यापकगण तथा विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
यह आयोजन न केवल शिक्षाविदों के लिए अपितु पर्यावरण एवं वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। औद्योगिक वानस्पतिक विज्ञान: नवाचार एवं व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य के अंतर्गत औद्योगिक वानस्पतिक विज्ञान की भूमिका, महत्ता एवं अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श किया गया। इस विषय के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि किस प्रकार पादप संरचनाएँ, उनके विभिन्न भाग तथा उनसे प्राप्त उत्पाद औद्योगिक क्रांति में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। विभिन्न विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान के विविध पहलुओं पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। विद्यार्थियों द्वारा विशिष्ट विषयों पर प्रबुद्ध व्याख्यान विद्यार्थियों ने अपने-अपने प्रस्तुतियों के माध्यम से औद्योगिक वानस्पतिक विज्ञान के विविध पहलुओं को रेखांकित किया।

- छात्रा नेहा गुप्ता द्वारा पर्णों (पत्तियों) से निर्मित विविध उपयोगी उत्पादों पर प्रकाश डालते हुए उनके वाणिज्यिक उपयोग एवं पर्यावरणीय महत्ता को उजागर किया गया एवं बताया गया कि किस प्रकार वृक्षों के पत्तों से बायोडिग्रेडेबल प्लेट, कागज एवं औषधीय उत्पाद निर्मित किए जा सकते हैं।
- छात्रा भारती साकेत, गौरव जायसवाल एवं सिमरन केवट द्वारा मूल (जड़ों) की औद्योगिक उपयोगिता पर व्याख्यान देते हुए औषधीय पौधों की जड़ों से बनने वाली औषधियों, सुगंधित तेलों एवं रंगों के बारे में जानकारी प्रदान की गई।
- छात्रा अरुणा साकेत एवं रामप्रकाश साहू द्वारा फलों से उत्पन्न उपयोगी उत्पादों की विस्तृत व्याख्या करते हुए जानकारी दी गई, कि कैसे जैविक फलों से जैम, जैली, प्राकृतिक रंग, सौंदर्य प्रसाधन एवं औषधीय तेल निर्मित किए जाते हैं।
- छात्रा अंशिका कुशवाहा द्वारा बीजों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए उनके खाद्य, औषधीय एवं जैविक ईंधन के रूप में उपयोग पर बल दिया गया।
- छात्रा खुशी गुप्ता द्वारा अपनी प्रस्तुति को एक कहानी शैली में प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रकृति और मानव जीवन के परस्पर संबंध को रेखांकित किया गया साथ ही एक किसान और वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ता के मध्य संवाद के माध्यम से औद्योगिक-वानस्पतिक विज्ञान के महत्त्व को दर्शाया गया।
महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा बताया गया कि प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग ही राष्ट्र की आर्थिक एवं पर्यावरणीय स्थिरता का आधार है। यह शैक्षिक उत्थान की ओर एक अभिनव पहल है। उनके द्वारा विद्यार्थियों को वानस्पतिक अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने हेतु प्रेरित किया गया।
READ MORE ; कमला कॉलेज में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन

कार्यक्रम का संयोजन कर रहीं सहायक प्राध्यापक सुषमा देवी तिवारी द्वारा बताया गया कि, “औद्योगिक- वानस्पतिक विज्ञान केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित नहीं, अपितु यह एक व्यापक शोध एवं नवाचार का विषय है।” उनके द्वारा विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में शोध एवं नवाचार हेतु प्रेरित किया गया। संगोष्ठी के समापन से पूर्व विज्ञान विभागाध्यक्ष द्वारा कार्यक्रम में शामिल समस्त प्राध्यापक साथियों, कर्मचारियों एवं छात्रों के प्रति आभार प्रदर्शन किया गया। इस सफल संगोष्ठी के उपरांत महाविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया कि भविष्य में औद्योगिक वानस्पतिक विज्ञान पर एक अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी, जहाँ विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक संगोष्ठी नहीं, अपितु शोध, नवाचार एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था, निश्चित रूप से इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्राप्त होगा और वे भावी शोधकर्ताओं एवं उद्यमियों के रूप में उभर सकेंगे, साथ ही सभी प्रतिभागी छात्रों को प्रमाणपत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम का संचालन छात्रा अक्षरा वर्मा एवं आस्था सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम प्रतिवेदन पन्नेलाल गोस्वामी द्वारा तैयार किया गया। इस दौरान सहा. प्राध्यापक डॉ. सुनीता सक्सेना, डॉ. अनिल नायर, मंगलेश्वर गुप्ता, अभिनव शुक्ला, प्रदीप सोनी, प्रकाश नारायण सिंह, डॉ. प्रीति शुक्ला, नरेन्द्र मिश्रा, विनय त्रिपाठी, धर्मेन्द्र द्विवेदी, अन्नू जायसवाल, हंसराज सिंह, नीतू सिंह, सृष्टि गुप्ता, रामायण प्रसाद भट्ट, जय नारायण विश्वकर्मा एवं छात्रों की उपस्थिति सराहनीय रही।